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बॉम्बे  टॉकीज़ : सिनेमा जगत का स्तम्भ  

यह पुस्तक 'बॉम्बे टॉकीज़' - सिनेमा जगत का स्तम्भ, प्रख्यात वरिष्ठ फिल्म पत्रकार कृष्ण मोहन श्रीवास्तव द्वारा लिखित भारतीय सिनेमा के आधार स्तम्भ 'बॉम्बे टॉकीज़' एवं उसके संस्थापक राजनारायण दूबे के अन्तर्सम्बन्धों का शिलालेख है | 'बॉम्बे टॉकीज़' की स्थापना, विकास और त्रासद अंत की कथा यात्रा है | कृष्ण मोहन श्रीवास्तव ने अपने पचास साल के पत्रकारिता जीवन के अनुभव को इस पुस्तक के माध्यम से पाठकों तक पहुँचाने का ऐतिहासिक एवं दुस्साहसिक काम किया है |

           'बॉम्बे टॉकीज़' के संस्थापक राजनारायण दूबे, हिमांशु रॉय एवं देविका रानी की त्रिमूर्ति को ऐतिहासिक तथ्यों के साथ इतिहास के अँधेरे से निकालकर वर्तमान के पटल पर नग्न सत्य के साथ प्रकट किया है | एक तरफ 'बॉम्बे टॉकीज़' का चमचमाता ग्लैमर, स्वर्णिम सफलता, लीजेंड बनने की प्रक्रिया है, तो दूसरी तरफ उसके पीछे राजनारायण दूबे का भीषण संघर्ष, कभी न हारने वाली प्रबल इच्छाशक्ति, व्यावसायिक कौशल, कला के प्रति उत्कट प्रेम है | 'बॉम्बे टॉकीज़' की फ़िल्में और उसके कलाकार जो अपने जीवन काल में ही किंवदंती बन गए, उनसे जुड़ी अनजानी - अनसुनी सत्य - घटनाओं को पूरी सत्यता और बेबाकी के साथ प्रस्तुत किया गया है| कृष्ण मोहन श्रीवास्तव के अनुसार उनके स्वर्णिम पत्रकारिता वर्ष में लिखित यह पुस्तक 'बॉम्बे टॉकीज़' भारतीय सिनेमा के इतिहास का दस्तावेज़ है, जो आने वाली पीढ़ियों का अनंत काल तक उचित मार्गदर्शन करेगी |