• Vishwa Sahitya Parishad

काशी विद्यापीठ,वाराणसी में सम्मानित हुए फ़िल्मकार आज़ाद

४ अगस्त ,२०१९ को ऐतिहासिक काशी विद्यापीठ के ऐतिहासिक सभागार में मुख्यधारा की पहली संस्कृत फ़िल्म ‘अहम ब्रह्मास्मि’ का ट्रेलर तथा गीत प्रदर्शन के साथ ही राष्ट्रवादी फ़िल्म राष्ट्रपुत्र का फ़्रान्स में आयोजित विश्वप्रसिद्ध कान फ़िल्म फ़ेस्टिवल में वैश्विक प्रदर्शन के उपलक्ष्य में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर काशी विद्यापीठ,वाराणसी की ओर से काशी विद्यापीठ के कुलपति टी एन सिंह ने आज़ाद को उनकी फ़िल्म कला,संस्कृत और भारतीय संस्कृति में महती योगदान के लिए प्रशस्ति-पत्र के साथ सम्मानित किया।

भारत की ऐतिहासिक फिल्म कंपनी बॉम्बे टॉकीज़ और महिला निर्मात्री कामिनी दुबे के संयुक्त निर्माण और सैन्य विद्यालय के यशस्वी छात्र एवं राष्ट्रवादी फ़िल्मकार आज़ाद के द्वारा लिखित-निर्देशित-अभिनीत फ़िल्म अहम ब्रह्मास्मि शीघ्र प्रदर्शन हेतु तैय्यार है। इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य अतिथि वृंद ने फ़िल्म का ट्रेलर देखकर आज़ाद के नेतृत्व में भारत की संस्कृति के संवाहक देव भाषा संस्कृत के संवर्धन एवं संरक्षण के साथ ही पूरे विश्व में संस्कृत के प्रचार-प्रसार के भगीरथ प्रयास की मुक्त कंठ से भूरि-भूरि प्रशंसा की। आज़ाद के इस विरल रचनात्मक कार्य और देश - विदेश में देव भाषा संस्कृत के विकास में आज़ाद के योगदान की गहन चर्चा की। आमंत्रित गणमान्य अतिथियों ने एक स्वर में कहा कि विश्व पटल पर संस्कृत के प्रचार प्रसार के लिए मुख्यधारा की पहली संस्कृत फ़िल्म की रचना कर फ़िल्मकार आज़ाद ने माँ भारती के योग्य सपूत होने का प्रमाण दिया है।


आज़ाद की बहुप्रतिक्षित फ़िल्म अहं ब्रह्मास्मि के संदर्भ में आज़ाद ने कहा कि भारत को जानने और समझने के लिए संस्कृत की शरण में आना होगा। संस्कृत है तो संस्कृति है। आज़ाद ने गुरु गंभीर स्वर में कहा कि हमें अपनी सनातन संस्कृति पर गर्व है। आज़ाद ने कहा कि देश में जन्म लेने वालों का एक ही लक्ष्य होना चाहिए “राष्ट्र प्रथमम् व्यक्ति द्वितीयं”।

इस भव्य समारोह की अध्यक्षता काशी विद्यापीठ, वाराणसी के माननीय कुलपति प्रोफ़ेसर टी एन सिंह ने की। मुख्य अतिथि श्री जगन्नाथ संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफ़ेसर गंगाधर पांडा ने भी अपने सारगर्भित विचार व्यक्त किए।


इस अवसर पर अपने उद्गार और विचार व्यक्त करते हुए काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रोफ़ेसर टी एन सिंह ने कहा कि फ़िल्मकार आज़ाद स्वयं में ही एक संस्था हैं। मैं इस पूरी टीम को, बॉम्बे टॉकीज़ को बहुत बहुत बधाई देता हूँ, बहुत बहुत शुभकामनाएँ देता हूँ और निश्चित तौर पर हम जो विश्व गुरु का सपना देख रहे है वह हम केवल संस्कृत की समृद्धि से पुनः साकार कर सकते है। कुलपति टी एन सिंह ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि आपके अन्दर, हम सबके अन्दर जो ब्रह्म है उसे पुनः जागृत करें और फ़िल्म अहं ब्रह्मास्मि का हम ज़रूर अवलोकन करेंगे और केवल अवलोकन ही नही करेंगे बल्कि सारे लोगों को बताने की कोशिश भी करेंगे कि किन मुद्दों के आधार पर इस तरह की जो अंतरपीड़ा थी फ़िल्मकार आज़ाद जी के अन्दर उसको पूरे समाज के अन्दर बताएंगे। उन्होंने आगे कहा कि अभिजित जी को सुनने के बाद मुझे लग रहा था कि कोई काव्यशास्त्री काव्य का पाठ कर रहा हो। जिस तरह से उन्होंने मधुरता से, सरलता से और सहजता से अपनी बातों को रखा, ऐसा नहीं लग रहा था कि कोई सिर्फ बॉम्बे टॉकीज़ से जुड़ा हुआ एक व्यक्ति है बल्कि मुझे लग रहा था कि कोई हिंदी का मूर्धन्य, संस्कृत का बहुत ही सुसंस्कृति प्राप्त अध्यापक बोल रहा हो । धाराप्रवाह उनका संभाषण चाहे वह संस्कृत हो, हिंदी हो, वह काव्य में हो या गद्द्य में हो। इससे हमें यह लगता है की यदि ऐसे पृष्ठभूमि के लोग जुड़े हुए हों तो पिक्चरें कैसी होंगीं यह सहज में ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है ।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री जगन्नाथ संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफ़ेसर गंगाधर पांडा ने कहा कि अहं ब्रह्मास्मि हमारे सनातन शास्त्रों का सार है । हमारे मंत्र द्रष्टा ऋषि पूर्वजों का दिव्य अनुभव है। फ़िल्मकार आज़ाद और उनकी दिव्य कृति “अहं ब्रह्मास्मि” सनातन भारत के गौरव की अमूल्य निधि है। गणमान्य अतिथियों ने बॉम्बे टॉकीज़ का पुण्य स्मरण करते हुए कहा कि बॉम्बे टॉकीज़ की परम्परा हमेशा से ही सामाजिक सरोकारों से जुड़ी हुई विचारोत्तेजक फ़िल्मों के सृजन का रहा है। उसी परम्परा का अनुपालन करते हुए सनातनी राष्ट्रवादी फ़िल्मकार आज़ाद ने भारत की सभ्यता और संस्कृति से संस्कृत के माध्यम से विश्व समुदाय को जोड़ने का काम किया है।

इस अवसर पर बॉम्बे टॉकीज़ के लेखन विभाग के अध्यक्ष कवि - लेखक व आज़ाद के निकटतम सहयोगी अभिजित घटवारी ने आज़ाद की सृजन प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि फ़िल्मकार आज़ाद सनातन भारत के सृजन पुरुष हैं।

ज्ञातव्य है कि छः दशकों के अंतराल के बाद भारतीय सिनेमा के आधार स्तम्भ राजनारायण दूबे द्वारा १९३४ में स्थापित बॉम्बे टॉकीज़ का आज़ाद के नेतृत्व में राष्ट्रपुत्र के साथ भव्य पुनरागमन हुआ है। अहं ब्रह्मास्मि उसकी सफलता और कलात्मक विस्फोट की अगली कड़ी है।


आज़ाद ने अहं ब्रह्मास्मि के सृजन के दौरान प्राप्त अपने अनुभव को सांझा करते हुए कहा कि पहले मैं अपने टीम के साथ अकेला था लेकिन अहं ब्रह्मास्मि के प्रचार प्रसार के कार्यक्रम के साथ - साथ दृश्य बदल गए। आज लाखों लोग बच्चे – बूढ़े, नौजवान, स्त्री –पुरुष मेरे इस अभिनव अभियान में कदम से कदम मिला कर चल रहे हैं। आज़ाद ने पुरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि मैं भारत का आने वाला कल देख रहा हूँ, कि जब हजारों, लाखों भरतबंशी हाथ में भगवा ध्वज लिए, वन्दे मातरम् का नारा लगाते संस्कृत में संवाद कर रहे होंगे। संस्कृत ही जन – जन की, परिवार की, व्यापार की जन भाषा होगी।

अहं ब्रह्मास्मि महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद के जीवन और दर्शन पर आधारित वर्तमान की फ़िल्म है। फ़िल्मकार आज़ाद फ़िल्म के ज़रिए राष्ट्रवाद का संदेश देना चाहते हैं। आज़ाद ने काशी विद्यापीठ, वाराणसी के खचाखच भरे सभागार में उपस्थित गुणीजनों, विद्वानो और शिक्षविदों के समारोह में अपनी धारणा को पुष्ट करते हुए घोषणा की कि एक सनातन प्रश्न है - मैं कौन हूँ? और उसका एक ही सनातन उत्तर है- अहं ब्रह्मास्मि

For any media inquiries, please contact us

Contact - 91+ 9322411111

 Address - 1 Dube House, Carter Road No. 9, Borivali – East, Mumbai – 400066. Maharashtra, India

© vishwasahityaparishad

  • White Twitter Icon
  • White Facebook Icon
  • White Instagram Icon
  • Black Twitter Icon
  • Black Facebook Icon
  • Black Instagram Icon